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खाटू श्याम जी मेले 2019 की फोटो
बाबा खाटू श्यामजी के आसपास घूमने के स्थान

खाटूश्याम जी के भजन


 

खाटूश्यामजी की कहानी:

श्री खाटू वाले श्याम जी की कहानी इस प्रकार है . यहा आप देखेंगे की किस तरह खाटू श्याम जी ने अपनी लीला रचकर अपने शीश को खाटू श्याम मंदिर के पास श्याम कुंड से अवतरित किया . जय हो आपकी खाटू श्याम जी खट्वा नगरी (खाटू धाम) में एक गाय जो रोज घास चरने जाती थी , रोज जमीन के एक भाग पर खडी हो जाती थी . उसके थनों से स्वता दूध की धार उस धरा में समां जाती थी जेसे की कोई जमीन के अन्दर से उस गौ माँ का दूध पी रहा है . घर पर आने के बाद गौ मालिक जब उसका दूध निकालने की कोशिस करता तो गौ का दूध उसे मिल नही पाता था . यह क्रम बहूत दिनों तक चलता रहा . गौ मालिक से सोचा की कोई न कोई ऐसा जरुर है जो उसकी गाय का दूध निकल लेता है .एक दिन उस गौ मालिक ने उस गाय का पीछा किया . उसने संध्या के समय जब यह नज़ारा देखा तो उसकी आँखे इस चमत्कार पर चकरा गयी . गौ माँ का दूध अपने आप धरा के अन्दर समाने लगा. गौ मालिक अचरज के साथ गाव के राजन के पास गया और पूरी कहानी बताई . राजा और उनकी सभा को इस बात पर तनिक भी यकीं नही आया . पर राजा यह जानना चाहता था की आखिर माजरा क्या है . राजा अपने कुछ मंत्रियो के साथ उस धरा पर आया और उसने देखा की गौ मालिक सही बोल रहा है . उसने अपने कुछ लोगो से जमीन का वो भाग खोदने के लिए कहा . जमीन का भाग जेसे ही खोदा जाने लगा , उस धरा से आवाज आई , अरे धीरे धीरे खोदो , यहा मेरा शीश है उसी रात्रि राजा को स्वपन आया की राजन अब समय आ गया है मेरे शीश के अवतरित होने का . मैं महाभारत काल में वीर बर्बरीक था और मेने भगवान श्री कृष्णा को अपना शीश दान में दिया दिया फलस्वरूप मुझे कलियुग में पूजित जाने का वरदान मिला है , खुदाई से मेरा शीश उसी धरा से मिलेगा और तुम्हे मेरा खाटू श्याम मंदिर बनाना पड़ेगा . सुबह जब राजा उठा तो तो स्वपन की बात को ध्यान रखकर कुदाई पुनः शरू करा दी , और फिर जल्द ही कलियुग देव श्री श्याम का शीश उस धरा से अवतरित हुआ .

खाटू श्याम जी मंदिर की आरती का समय:

आरती शीतकाल ग्रीष्मकाल
मंगला आरती प्रात: 5.30 बजे प्रात: 4.30 बजे
श्रृंगार आरती प्रात: 8.00 बजे प्रात: 7.00 बजे
भोग आरती दोहपर 12.30 बजे दोपहर 12.30 बजे
संध्या आरती सांय 6.30 बजे सांय 7.30 बजे
शयन आरती रात्रि 9.00 बजे रात्रि 10.00 बजे


 

खाटू श्याम जी मंदिर खुलने का समय:

खुलने का समय बंद करने का समय
शीतकाल ( प्रात:) प्रात: 5.30 बजे दोपहर: 1.30 बजे
शीतकाल (दोपहर) सांय 4.30 बजे  रात्रि 9:30 बजे
ग्रीष्मकाल( प्रात:) प्रात: 4.30 बजे  दोपहर: 1.30 बजे
ग्रीष्मकाल (दोपहर) सांय 4.30 बजे रात्रि 10.00 बजे

नोट : * हर ग्यारस पर खाटू श्याम जी मंदिर 24 घंटे खुला रहता है|


How to Reach Khatu Shyam Ji Temple:

One can either land at Delhi or Jaipur from any part of the country by Rail / Road / Air and from there, follow the suggested routes

From : Delhi to Khatu Shyam Ji Temple

By Road :

  • Delhi to Gurgaon – Manesar – Dharuheda – Bahror – Kotputli – Shahpura – Chandwaji – Choumu – Ringas – Khatu Shyam Ji Mandir(Approx. 300 km)
  • Delhi to Gurgaon – Manesar – Dharuheda – Bahror – Kotputli – Shahpura – Ajitgarh – Deorala – Shri Madhopur – Ringas – Khatu Shyam Ji Mandir(Approx. 270 km.)

Daily bus services from Delhi – Khatu Shyam Ji- Daily bushes are being operated by Rajasthan Roadways and Haryana Roadways from Sarai Kale khan.

By Rail : Delhi – Ringas – Khatu Shyam Ji.

  • Delhi to Ringas (khatu shyam ji) :

  • Ringas to Delhi:

  • Rewari to Ringas

  • Ringas to Rewari

  • Ringas to Sikar

  • Sikar to Ringas (khatu shyam ji)

  • Jaipur to Ringas
  • Ringas to Jaipur
  • Nearest Airport to Khatu Shyam Ji:Jaipur International Airport





    Distance from Different Locations to Khatu Shyam ji:

    • Ringas to Khatu Shyam Ji: 17 km. by road.
    • Jaipur to Khatu Shyam Ji Via Ringas : 88 KM by Road (Direct Buses are available from Sindhi Camp Bus stand, Jaipur)
    • Jaipur to Khatu Shyam Ji Via Chomu, Kaladera, Badhal, Lamiya: 75 KM by Road

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