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श्री आलू सिंह जी महाराज :-

खाटू नगरी में एक राजपूत परिवार में किशन सिंह ही के घर सन 1916 में आलू सिंह जी का जन्म हुआ | उनके पिता श्याम बाबा के भक्त थे और बचपन से ही उन्हें श्याम सेवा के संस्कार अपने पिता से मिले |

बड़े होने पर इनका विवाह सवाईमाधोपुर के राजावत परिवार की कन्या से हुआ और कुछ वर्ष बाद इनके पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम पाबूदान रखा गया | कुछ वर्षो बाद इनकी पत्नी का देहांत हो गया और फिर इन्होने अपना आगे का जीवन श्याम चरणों में समर्प्रित कर दिया |

100 किमी की दुरी पुष्कर जाके लाते थे श्याम बाबा को सजाने के पुष्प :

आलू सिंह जी पर श्याम बाबा की इतनी दीवानगी थी की वे बाबा श्याम का श्रंगार करने के लिए पुष्प को लेने पुष्कर पैदल ही चले जाते थे | उनके जीवन में बस अब एक ही काम रह गया था और वो थी श्याम बाबा की सेवा और उनकी महिमा को जन जन तक पहुँचाना |



श्याम बाबा की दीवानगी को लोगो ने दिया पागलपन का नाम :

आलू सिंह जी सामान्य व्यक्ति नही थे | वे घंटो तक बाबा के भजन गाते , बाबा में लीन हो जाते , खुद ही बाते करते रहते , पैदल ही दिन भर चल कर दुसरे शहरो से पुष्प लाते और बाबा श्याम का श्रंगार करते | उनका जीवन बस श्याम सेवा में लगा हुआ था और वे दुनिया दारी परिवार से भी कोई मतलब नही रखते थे | पर यह सब भाव था सिर्फ अपने श्याम समर्पण का | दुनिया आज समझने लग गयी की यह पागलपन नही श्याम दीवानगी थी |

श्याम बाबा ने मिलवाया श्याम बहादुर जी से :

इनके बड़े भाई नत्थू सिंह को एक रात्रि स्वप्न में श्याम बाबा ने आदेश दिया की आलू सिंह को रेवाड़ी ले जाके श्याम बहादुर  जी से मिलाये | श्याम बहादुर जी ने उन्हें गले लगा लिया और उन्हें अपना शिष्य बना लिया | साथ ही आशीष भी दिया की आज के बाद तुम भी श्याम भक्तो में गुरुवर कहलाओगे | श्याम बहादुर  जी ने उन्हें पूर्ण स्वस्थ बताया और उनपे श्याम रंग होने की बात कही |

देश के कोने कोने में श्याम ज्योत :





आलू सिंह जी ने श्याम बाबा की महिमा को देश के कोने कोने में पहुँचाया और आज हम देखते है की लाखो भक्त खाटू श्याम दर्शन करने आते है | श्याम बगीची में वे भाति भाती के पुष्प लाके बाबा का नित्य श्रंगार करते थे और सेवा करते करते श्याम लीन हो गये |


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